हर रात मैं, विचारों के शूलों से उलझ जाता हूँ,
और सुबह तुम्हारे लिए, इक नया गुलाब लाता हूँ .नहीं जानता तुम्हे पसंद आएगा भी या नहीं ?
हर बार की तरह इस बार भी ......
हैं तुमसे प्यार, यह जाताना आएगा भी या नहीं ?
अक्सर तुम्हारे ख़यालों में, इस कदर खो जाता हूँ ;
कुर्सी पर सर टेके ही सो जाता हूँ ..
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