Wednesday, November 26, 2014

तूफ़ान

शहरों में गिरता हैं तिनका तो शोर मच जाता हैं ...
और तूफ़ान का चर्चा, चंहूँ ओर पहुँच जाता हैं ....
यूँ ही गिर जाते हैं दरख्त जंगलों में ...
आवाज होती हैं मगर सुन कोई नहीं पाता हैं ....
दोस्त, इंसानों की दुनिया के नियम भी बड़े अजीब हैं ....
यहाँ तूफ़ान के जोर पर उड़ते तिनकों का बवंडर  तो नजर आता हैं ....
पर जमीदोज हुआ दरख्त और उसके निशान नज़रअंदाज हो जाते हैं ....

No comments:

Post a Comment