खड़ा हूँ, सूरज की तरफ रुख करके ...
आनंदित, प्रफुल्लित, पुलकित ...
सुबह हो गई हैं; और आज फिर एक...
झूमती सी लम्बी परछाई मेरे पीछे खडी हैं ....
खड़ा हूँ , तपते सूरज को अपने सर पर लेकर ...
पसीने से भीगा, हैरान, परेशान
चिलचिलाती दोपहर; और आज फिर एक ...
छटपटाती छोटी सी परछाई मेरे कदमों के तले पडी हैं ....
खड़ा हूँ, सूरज की तरफ रुख करके ...
अशांत, निराश, डरा, सहमा
शाम का वक्त हैं , और आज फिर एक...
उदास सी लम्बी परछाई मेरे पीछे खडी हैं ...
हाँ जिन्दगी, तुम आज फिर से
अंधेरों में गुम होती नज़र आ रही हो ...
आनंदित, प्रफुल्लित, पुलकित ...
सुबह हो गई हैं; और आज फिर एक...
झूमती सी लम्बी परछाई मेरे पीछे खडी हैं ....
खड़ा हूँ , तपते सूरज को अपने सर पर लेकर ...
पसीने से भीगा, हैरान, परेशान
चिलचिलाती दोपहर; और आज फिर एक ...
छटपटाती छोटी सी परछाई मेरे कदमों के तले पडी हैं ....
खड़ा हूँ, सूरज की तरफ रुख करके ...
अशांत, निराश, डरा, सहमा
शाम का वक्त हैं , और आज फिर एक...
उदास सी लम्बी परछाई मेरे पीछे खडी हैं ...
हाँ जिन्दगी, तुम आज फिर से
अंधेरों में गुम होती नज़र आ रही हो ...